चीन के अफ़वाहों पर विश्वास

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कहते हैं, झूठ के पांव नहीं होते मगर उसके सहोदर अफ़वाह के तो पैर के साथ-साथ पर भी होते हैं| एक तरफ झूठ कदमों से चलकर घंटों में पहुंचता हैं तो वहीं दूसरी ओर अफ़वाह उड़ कर चंद मिनट में ही अपना खेल खेल जाती हैं। वैसे इन सभी वक्तव्यों का निर्वाहन मनुष्य के कर कमलों द्वारा ही पूरा किया जाता हैं।
कहा जाता है, कि मानव मस्तिक जटिल व मिश्रित होता हैं। अब यह अफ़वाह शब्द सहित मानव को भारत के नजरिए से देखा जाए तो यहां के समाज में अफ़वाह कुछ अधिक ही रचनात्मक होती हैं। हम इतिहास को पढ़कर माना जाता हैं,कहा जाता हैं,सुना जाता हैं, जैसे शब्दों से अपने विवरण का शुरुआत करते हैं।
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हालांकि यह शब्द कितना काल्पनिक और हकीकत हैं इसका अंदाजा करना असंभव नहीं तो मुश्किल जरूर होता हैं| हम खुद को भारतीय होने पर गौरवान्वित महसूस करते हैं,लेकिन उसी गौरव के पीठ पीछे अपनी जुबान से भ्रम की परिभाषा को उल्लेखित करते जाते हैं। हम यह जानते हैं कि महाभारत और पंचतंत्र की रचनाएं काल्पनिक हैं किंतु उसे अपना उत्स मानकर अफवाहों की दुनियाँ का उत्स बन जाते हैं।
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प्राकृतिक आपदा के दौरान तो भारतीय प्रतिभा अपने चरम पर होती हैं। मौजूदा स्थिति में इसका सबक हमें देखने को मिला,दिसंबर 2019 चीन के वुहान शहर से चमगादरियें आपदा की शुरुआत तो हुई मगर यह महामारी जैसी आपदा भारत में प्रवेश करते ही हो हल्ला मच गया | हम लोग कॉलेज कैम्प से घर आए ही थे कि अचानक शोर मचा की पटना में इस कोरोना जैसी महामारी से बहुत सारे लोग संक्रमित हो चुके हैं|
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17 मार्च का वह दिन सभी लोग एक दूसरे से दूरियां बनाने लगे और अपने मुंह को मास्क से ढक लिया ।लोगों में शोर था कि कोरोना हवा में आकर नाक के अंदर से शरीर में प्रवेश कर जाएगा। हालांकि यह हकीकत नहीं बल्कि अफवाहें थी corona का असर हवा में होता ही नहीं,साथ ही साथ गांव के लोग तो यह मान बैठे हैं कि यह एक शैतान हैं जो वेश बदल कर आया हैं और उनका मानना हैं कि हमारी देवी देवता इसे भगा देंगे |
गांव की औरतें “ओम जय लक्ष्मी, निमिया के डाढ़ मैया, आ जाना मैया” जैसे गीत गाकर देवी देवताओं को बुला रही हैं कि corona जैसी महामारी को समाप्त करें | कुछ लोगों के कहने पर उनका विश्वास कायम हो चुका हैं|
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इस तरह से स्पष्ट है कि भारत अपनी परंपराओं में लीन हैं |यहां के लोगों का विश्वास अफवाहों की दुनियाँ में भ्रमित घूम रहा हैं। मानों विश्वास लोगों में नहीं बल्कि लोगों पर अफवाहों की हवा चली हो।
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