Nirbhaya कांड: 2012 Delhi गैंग rape….जाने पूरी बाते

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Nirbhaya कांड: 2012 Delhi गैंग rape….जाने पूरी बाते

राजधानी दिल्ली के सुनसान सड़कों पर एक बेटी का बलात्कार कर दिया जाता हैं। सामूहिक बलात्कार के तकरीबन 12 दिन बाद उस बेटी की मृत्यु सिंगापुर के एक अस्पताल में हो जाती हैं। मामला न्यायालय में जाता हैं किंतु सबूत होने के तत्पश्चात भी संवैधानिक गतिविधियों के कारण उस बेटी की चीख़ तकरीबन सात साल बाद शांत होती हैं। परिवार वालों के आंसू 20 मार्च 2020 को रूकती हैं | मां की ममता जो एक मृत बेटी की चीख़ को शांत करने के लिए सैकड़ों बार न्यायिक दरवाजे को खटखटातीं रही तब जाकर उसकी ममता को न्याय मिल पाता हैं।

16 दिसंबर 2012 रात के 9:30 बजे थे | Nirbhaya अपने साथी अरविंद प्रताप के साथ ऑफिस से बाहर निकली थी | साउथ दिल्ली के मुनारिका में दोनों घर वापस द्वारका जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे। तभी अचानक एक प्राइवेट बस जिसे यह रोककर उस पर चढ़ जाते हैं | बस में पहले से छ: लोग ड्राइवर सहित मौजूद थे | बस खाली खाली सी थी। परंतु दोनों को तो घर जाना था,कुछ देर चलने के बाद बस में बैठे अन्य छह लोगों की हरकत शुरू हुई और एक सामूहिक बलात्कार का अंजाम दिया गया। हालांकि राजधानी दिल्ली व देश में घटित घटना पूरे देशवासियों को झकझोर कर रख दिया।

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चारों तरफ कैंडल मार्च का दौर शुरू हुआ और आरोपियों को फांसी की मांग होने लगीं | देश व जनता की मांग को देखते हुए न्यायालय भी सख्तीं को अपनाकर फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का आदेश दिया और सभी ऐसे मामले जल्द से जल्द निपटाने का संदेश दिया | उस समय ऐसा लगा मानो सभी आरोपियों को तुरंत फांसी दे दी जाएगी। परंतु होनी को ऐसा मंजूर नहीं था | एक बेटी की चीख़, एक मां की ममता को 7 सालों तक पूरे भारत को सुनाना था |  आखिरकार बेटी की चीख़ रूकी पर दहलीज़ से बाहर जाकर |

सभी आरोपियों को जिनमें मुकेश सिंह, विनय शर्मा, पवन गुप्ता तथा अक्षय ठाकुर को बलात्कार(सेक्शन 377),मर्डर(सेक्सन 303), अगवा (सेक्सन 363),लूटपाट(सेक्शन 392), हमला( सेक्सन 352) के तहत बीस मार्च 2020 को सुबह साढ़े पाच बजे फांसी के फंदे पर लटका दिया गया |

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यह दिन इसलिए खास बन जाता हैं क्योंकि एक मां की ममता को सुकून मिल गया | न्यायिक व्यवस्था से उठते जा रहे विश्वास पुनः स्थापित हो गया। एक बेटी की चीख़ रुक गई तथा उसकी आत्मा को शांति मिल गई | पूरा भारत एक स्वर में न्याय और न्यायालय को जय बोल गया। आज Nirbhaya जीत गई।

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