नमस्कार मैं कोरोना

corona
जरा सोचिए अगर किसी वायरस का दिल हो तो वह क्या चाहेगा? जर्मं होने का धर्म निभाएगा या अपनेपन की शक्ति बताएगा | सचमुच यह बात बड़ी अलबेला हैं, जी हां आज हम एक वायरस की हीं आत्मकथा सुनाते हैं, एक जर्मं का सफर उसी की जुबानी बताते हैं। इस वायरस का दिल भी टूटता हैं और जर्मनाथ खंडित हो जाता हैं। आखिर जब यह टहलते हुए भारत आता हैं तो इसे यहां अपनी हार का एहसास होता हैं।
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चैत्र मास की कड़कड़ाती धूप, साथ ही भारत में गर्मियों का दिन चल रहा हैं, हाथ में शिकंजी लिए दो-दो घुट के साथ शरबतों का घोल गले की सूखी रास्ते को तर करने में लगा हुआ हैं | लोग दुकानों पर शिकंजी के साथ बात का आनंद ले रहे हैं। तभी एकाएक एक आवाज चली माने लोगों में अफरा-तफरी मच गईं। हालांकि वो आवाज किसी जर्मं नामक अतिथि के आने की थी | उस जर्मनाथ का नाम corona था, किंतु लोग इस अतिथि के आने से सहमे हुए थे। सब लोग अलग-अलग जगहों पर इकट्ठा होकर देख रहे थे मानो अब तो corona साहब की खैर नहीं, किंतु करोना कुछ कहना चाहता था,पर लोग सुनने को तैयार न थे तभी एक व्यक्ति उस भीड़ को शांत कराते हुए जर्मनाथ से उसकी हालात सुनाने को कहता हैं| तब कोरोना अपनी बात कुछ यूँ भीड़ के सामने रखता है।
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सहमें-सहमें दया भाव से corona अपनी बातें रखता हैं कि सुना था जन्म के बाद बच्चे के रोने से उसकी उपस्थिति दर्ज होती हैं| हालांकि मेरे जन्म पर तो मेरा पूरा परिवार रोया(चीन),ये तो और खुशी की बात होनी चाहिए कि मेरे जन्म लेने का आभास मेरे साथ मेरे पूरे परिवार को हुआ | जब लोगों ने चिल्लाया तो मुझे अपने होने का आभास हुआ | पर हुआ क्या, कि मेरा जन्म चीन में हुआ था। अब चीन को मेरे जन्म पर सोहर गाना तो दूर मेरे साथ तो उसने ऐसा बर्ताव किया, मेरे खिलाफ जंग का ऐलान शुरू कर दिया। अब बताओ मेरे अपने ही मां-बाप ने नकार दिया,फिर क्या टूटे दिल के साथ मुंह उठाकर वहां से चल दिया और कुछ भले मनुष्य के जरिए अलग अलग देशों में दाखिल हो गया | पर क्या ,वहां भी इंसानियत बनाम जर्मनियत का सिलसिला अपना आग उगल रहा था, तब क्या मैंने प्रभु को याद किया और प्रभु के देश यानी आध्यात्मिक देश भारत की ओर बढ़ा,पर यह क्या! यहां तो मेरे नामों पर आरती शुरू हो गई थी।मुझे जिक्र, चुटकुले तथा कविताओं में रचा जा रहा था, डरना तो दूर हर व्यक्ति मस्त था |
मेरे आने के पहले ही यहाँ मेरा नाम रचा जा चुका था|
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लोगों में इतर-बितर लगा हुआ था, मानो मेरे आने से सब खुश हो | एसा लग रहा था कि घर मासी आईं हैं| हालांकि खुशियों का माहौल था, जोक का सिलसिला ‘आदरणीय सर मुझे corona हुआ हैं’ छुट्टी दें नहीं तो आफिस आ जाऊंगा’ के रूप में मेरे सर को हिला डाला, मुझे रात को नींद नहीं आईं | नींबू मिर्ची का जनाजा निकलने लगा, कोरोना हैं ही क्या ……बस दो छींक, जरा सी खांसी, इससे प्रभावी तो माँ की डांट हैं, कोरोना को कहों नमस्ते, जाओं कोरोना जाओं, जैसे स्लोगन ने तो मेरा चैन जैसे थोक के भाव बेच दिया था|  यहाँ तो कविताएँ भगोड़े कोरोना के उपमा के साथ सुनाई जा रहीं थी| और तो और ‘जा रे कोरोना जा जा जा तु जा जैसे गानों पर सपना चौधरी के ठुमके हिलोरें मारने लगे थें |  मधुबनी से चली मैथिली ठाकुर की वो आवाज मेरे ह्रदय को तार-तार कर दिया, मालिनी अवस्थी का सुर तो एसा लग रहा था  मानों कोरोना का अब हल्दी रश्म़ होने वाला हैं | मेरे नाम पर अब लोरियां गायी जा रहीं थी |
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अपनी चहेती कनिका कपूर में कोरोना निकलने के बाद भी लोगों में कोई सिसक नहीं था| अब तो गांव के लंगोटी पहने बच्चे भी मेरा ताक-झाक कर बेसर्बी से इन्तजार कर रहे थे | बीना डरें मुखियाजी भी मुंछे तानकर भोजपुरिया चैता का आनंद ले रहे थे| सड़कों पर मोमोज़ की वैसे ही मौज़ कट रही थीं | मुलाक़ातें दो कदम दूर से ही सफल हो रही थीं, गांव में गायें दस्तानें पहनकर दुहीं जा रहीं थीं |प्यार से मिलकर अपना काम किया जा रहा था, भारत आकर लगा सचमुच यहाँ प्यार भरी गलियां हैं| बिना खदेड़े, मुझे अपनाकर रखा परन्तु मुझे महसूस हुआ कि मैं पूरी दुनिया में कहर मचाकर भारत से हार गया…. |
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