Bihar: राजद का हृदय परिवर्तन…जाने हुआ क्या…

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Bihar: पंद्रह साल सत्ता से दूर रहने के बाद क्या लालू यादव की पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव करने की तैयारी में है। राष्ट्रीय जनता दल के पिछले कुछ समय के फैसलों को देखें तो इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। फिलवक्त राज्यसभा में लालू यादव को दो लोगों को भेजने का मौका मिला है। लालू यादव ने सभी दावेदारों को दरकिनार कर एक भूमिहार को अपना उम्मीदवार बनाया है। आखिर राजद के हृदय परिवर्तन की वजह क्या है, देखते हैं ये रिपोर्ट।

खास बाते:

  • राजद का हृदय परिवर्तन क्यों?

  • साथ चलेंगे, साथ बढ़ेंगेतेजस्वी

  • भूरा बाल साफ करोके दिन खत्म! सवर्णों को साथ लेकर चलने की रणनीति।

नब्बे के दशक में लालू यादव ने पिछड़ों और दलितों को खूद से जोड़ने के लिए सवर्णों पर जोरदार हमला बोला। भूरा बाल साफ करो के नारे की मदद से लालू यादव ने खूद को गरीबों, पिछड़ों, दलितों और अकलियतों से जोड़ने की कोशिश की। लालू ने भरोसा दिलाया कि वो सामंती विचारधारा के खिलाफ खड़ा होने वाले बिहार के इकलौते नेता हैं। दलितों और पिछड़ों के साथ मुस्लिम समुदाय ने भी लालू को अपना रहनुमा मान लिया।

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बिहार में विकास नहीं सिर्फ अगड़ों और पिछड़ों की राजनीति कर लालू यादव ने पंद्रह साल सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत बनाई। एक समय लालू यादव खुद कहा करते थे कि बिहार में लालू और बालू को खत्म नहीं किया जा सकता। आज सत्ता से पंद्रह साल तक दूर रहने के बाद लालू यादव की पार्टी को समझ गया है कि अब सत्ता में आने के लिए सबको साथ लेकर चलने की जरूरत है।

ये जानना आपको जरूरी है कि लालू यादव ने जिस जाति और धर्म की राजनीति से सत्ता में पकड़ बनाई थी, नीतीश कुमार ने उसी हथियार से उनकी सत्ता उखाड़ फेंकी। नीतीश कुमार ने बीजेपी से समझौता किया,  पिछड़ों और सवर्णों को साथ लेकर लालू यादव को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। नीतीश कुमार के दौर में बिहार ने विकास और सुशासन का दौर भी देखा। लोगों को समझ गया कि सिर्फ जाति और धर्म से बिहार का भला होने वाला नहीं है।

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आज की एनडीए सरकार ने लोकसभा चुनाव 2019 में विकास और जातिगत समीकरण का ऐसा कॉकटेल तैयार किया जिसमें लालू यादव का बिहार से सफाया हो गया। अब समझिये राजद में हो रहे बदलाव को, राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह राजपूत जाति से आते हैं। राज्यसभा में पहले से ही मनोज झा मोर्चा संभाले हुए हैं जो ब्राम्हण जाति से आते हैं। फिलवक्त लालू यादव ने सभी जातियों को दरकिनार कर एक भूमिहार अमरेंद्र धारी सिंह को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। इस फैसले पर बहुत सारे सवाल खड़े हुए हैं, जिसका जवाब लालू के बेटे और विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी ने अपने ट्वीट से दिया है। तेजस्वी ने लिखा है

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साथ चलेंगे, साथ बढ़ेंगे। मिलकर नया बिहार गढ़ेंगे। जाति धर्म से ऊपर उठकर हम सबों को मिलकर नए दौर में नया बिहार बनाना है। साथ आएं, हाथ मिलाएं, विकास की ओर कदम बढ़ाए। पुरानी बातों को भूल नया बिहार बनाए। इस ट्वीट से समझा जा सकता है कि तेजस्वी यादव किसे साथ आने की बात कर रहे हैं। आपको बता दें कि ये वही तेजस्वी हैं जिन्होंने गरीब सवर्णों के आरक्षण का जोरदार विरोध किया था लेकिन लोकसभा चुनाव में इसका कोई फायदा नहीं हुआ। अब आप समझ सकते हैं कि आखिर राजद के हृदय परिवर्तन की वजह क्या है।

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